Pages

Monday, December 3, 2012

अपने अतीत का परछाहा कहाँ छोड़ आओगे
जहाँ भी जाओगे काँधे पर लादे चले जाओगे .

Sunday, December 2, 2012

हर साथ में न बन सका मेरी सांसो का ये सिलसिला 
इन सिलसिलों को आवाज़ दो मेरी ज़िन्दगी को संभाल लो,
गज़ब हुआ उम्र का सफ़ा गिरा न इसपे कुछ सियाह 
सुफेदी से जरा उबार लो मेरी जिंदगी को संभाल लो 
ये जुबान की है जो सिलवटें ,मेरी बात खाये करवटें 
इन सिलवटों को निकाल दो ,मेरी जिंदगी को संवार दो




स्वागत

ब्लॉग में आपका स्वागत है